टॉपिक 4: छत्तीसगढ़ का अपवाह तंत्र एवं नदियां

नदियों से संबंधित प्रश्न परीक्षाओं में बहुत ज़्यादा संख्या में पूछे जाते हैं। छत्तीसगढ़ की नदियों को उनके बहने की दिशा और उनके समुद्र तक पहुँचने के आधार पर 5 प्रमुख अपवाह तंत्रों (Drainage Systems) में बाँटा गया है।

आइए, टॉपिक 4: छत्तीसगढ़ का अपवाह तंत्र एवं नदियां को पूरी गहराई से समझते हैं।

छत्तीसगढ़ के ढाल के अनुसार नदियों का वर्गीकरण उनके जल संग्रहण क्षेत्र (Catchment Area) के प्रतिशत के घटते क्रम में नीचे दिया गया है:

[छत्तीसगढ़ का अपवाह तंत्र — घटता क्रम]

महानदी तंत्र
~56.15%

गोदावरी तंत्र
~28.62%

सोन-गंगा तंत्र
~13.05%

ब्राह्मणी तंत्र
~0.63%

नर्मदा तंत्र
~0.55%

1. महानदी अपवाह तंत्र (Mahanadi Drainage System)

यह छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा और मुख्य अपवाह तंत्र है, जो राज्य के मध्य भाग (छत्तीसगढ़ के मैदान) में फैला है।

  • जल संग्रहण क्षेत्र: लगभग 56.15%
  • ढाल: पूर्व की ओर (बंगाल की खाड़ी)।

मुख्य नदी: महानदी (छत्तीसगढ़ की गंगा / जीवन रेखा)

  • उद्गम (Origin): सिहावा पर्वत (फरसिया नामक स्थान), धमतरी जिला।
  • कुल लंबाई: 858 किमी (परंतु छत्तीसगढ़ में प्रवाह केवल 286 किमी है, शेष ओडिशा में बहती है)।
  • तटीय शहर: राजिम, सिरपुर, शिवरीनारायण, चंद्रपुर।
  • विलेय (Mouth): Bengal की खाड़ी (ओडिशा के कटक के पास)।

महानदी की प्रमुख सहायक नदियां:

  • उत्तर से मिलने वाली (ऊपर से):
    • शिवनाथ नदी: यह छत्तीसगढ़ में बहने वाली सबसे लंबी नदी (290 किमी) है। इसका उद्गम गढ़चिरौली (महाराष्ट्र) से होता है और यह जांजगीर-चांपा के शिवरीनारायण में महानदी से मिलती है।
    • हसदेव नदी (176 किमी): कोरिया के सोनहट पठार से निकलती है। इस पर कोरबा में छत्तीसगढ़ का सबसे ऊँचा बाँध ‘मिनीमाता (बाँगो) बाँध’ बना है।
    • माण्ड नदी (155 किमी): मैनपाट (सरगुजा) से उद्गम। चंद्रपुर में महानदी से मिलती है।
    • इब नदी (202 किमी): खुर्जा पहाड़ी (जशपुर) से उद्गम। इस नदी के रेत में सोने के कण पाए जाते हैं।
  • दक्षिण से मिलने वाली (नीचे से):
    • पैरी नदी (90 किमी): भातगढ़ पहाड़ी (गरियाबंद) से उद्गम। राजिम में महानदी से मिलती है।
    • सोंढूर, सूखा, जोंक, लात नदियां।

महत्वपूर्ण परीक्षा फैक्ट – त्रिवेणी संगम (Triple Confluences):

  1. राजिम (गरियाबंद): महानदी + पैरी + सोंढूर (इसे छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहते हैं)।
  2. शिवरीनारायण (जांजगीर-चांपा): महानदी + शिवनाथ + जोंक।
  3. चंद्रपुर (सक्ती): महानदी + माण्ड + लात।

2. गोदावरी अपवाह तंत्र (Godavari Drainage System)

यह छत्तीसगढ़ का दूसरा सबसे बड़ा अपवाह तंत्र है, जो राज्य के दक्षिणी भाग (बस्तर संभाग) में स्थित है।

  • जल संग्रहण क्षेत्र: लगभग 28.62%
  • ढाल: दक्षिण-पश्चिम की ओर।

मुख्य नदी: इंद्रावती नदी (बस्तर की जीवन रेखा)

  • उद्गम: कालाहांडी (ओडिशा) के मुंगेर पर्वत से।
  • छत्तीसगढ़ में लंबाई: लगभग 264 किमी।
  • विशेषता: यह जगदलपुर (बस्तर) से होते हुए बहती है और इस पर भारत का सबसे चौड़ा जलप्रपात ‘चित्रकोट जलप्रपात’ स्थित है, जिसे भारत का नियाग्रा भी कहा जाता है। यह अंत में भद्रकाली (बीजापुर) के पास गोदावरी नदी में मिल जाती है।

अन्य सहायक नदियां:

  • शबरी नदी (173 किमी): बैलाडीला की पहाड़ी से निकलती है। विशेषता: इस नदी के सुकमा (कोन्टा) से आंध्र प्रदेश (कुनावरम) के हिस्से में छत्तीसगढ़ का एकमात्र अंतर्देशीय जलमार्ग (Inland Waterway) संचालित होता है।
  • कोट्री नदी: इसे ‘परलकोट नदी’ भी कहते हैं, इसका बेसिन राजनांदगांव और कांकेर में है।
  • डंकिनी-शंखिनी नदी: दंतेवाड़ा में बहती हैं। शंखिनी नदी को छत्तीसगढ़ की सबसे प्रदूषित नदी माना जाता है (बैलाडीला के लोहे के कारण इसका रंग लाल हो गया है)। इनके संगम पर प्रसिद्ध दंतेश्वरी मंदिर स्थित है।

3. सोन-गंगा अपवाह तंत्र (Son-Ganga Drainage System)

यह छत्तीसगढ़ के सुदूर उत्तरी भाग (सरगुजा, कवर्धा का ऊपरी हिस्सा, बलरामपुर, कोरिया) में स्थित है।

  • जल संग्रहण क्षेत्र: लगभग 13.05%
  • ढाल: उत्तर की ओर।
  • विशेषता: यहाँ की नदियां उत्तर की ओर बहकर ‘सोन नदी’ में मिलती हैं और सोन नदी अंत में गंगा नदी में विलीन हो जाती है।

प्रमुख नदियां:

  • रिहन्द नदी (145 किमी): छुरी-मतिरिंगा पहाड़ी (सरगुजा) से उद्गम। इसे सरगुजा की जीवन रेखा कहा जाता है। उत्तर प्रदेश में इस पर ‘रिहन्द बाँध’ (गोविंद बल्लभ पंत सागर) बना है।
  • कन्हार नदी (115 किमी): बखोना चोटी (जशपुर) से उद्गम। यह छत्तीसगढ़ और झारखण्ड की सीमा बनाती है। इस पर प्रसिद्ध ‘कोटली जलप्रपात’ है।
  • गोपद, बनास और नेऊर नदियां।

4. ब्राह्मणी अपवाह तंत्र (Brahmani Drainage System)

  • जल संग्रहण क्षेत्र: बहुत छोटा, केवल 0.63%
  • विस्तार: केवल जशपुर जिले के पूर्वी छोर पर।
  • प्रमुख नदी: शंख नदी (यह झारखण्ड की दक्षिण कोयल नदी के साथ मिलकर ब्राह्मणी नदी बनाती है)।

5. नर्मदा अपवाह तंत्र (Narmada Drainage System)

यह छत्तीसगढ़ का सबसे छोटा अपवाह तंत्र है।

  • जल संग्रहण क्षेत्र: सबसे कम, केवल 0.55%
  • विस्तार: कवर्धा (कबीरधाम) oars मुंगेली जिले के पश्चिमी भाग (मैकल श्रेणी के ढाल पर)।
  • प्रमुख नदियां: बंजर नदी और तांदा नदी। ये नदियां पश्चिम की ओर बहकर मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी में मिल जाती हैं।

डायरेक्ट एग्जाम फैक्ट्स (Quick Revision Key)

  • छत्तीसगढ़ की सबसे लंबी नदी: महानदी (858 किमी, छत्तीसगढ़ में 286 किमी)।
  • छत्तीसगढ़ में बहने वाली सबसे लंबी नदी: शिवनाथ नदी (290 किमी)।
  • बस्तर की जीवन रेखा: इंद्रावती नदी।
  • सरगुजा की जीवन रेखा: रिहन्द नदी।
  • सबसे प्रदूषित नदी: शंखिनी नदी (दंतेवाड़ा)।
  • रेत में सोने के कण वाली नदियां: इब नदी (जशपुर) और आमनेर नदी (सोनाखान)।

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