छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक/भौतिक विभाग

अब आगे बढ़ते हैं और आज टॉपिक 3: छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक/भौतिक विभाग (Physiographic Divisions of Chhattisgarh) को पूरी गहराई और प्रामाणिक आंकड़ों के साथ समझते हैं।

इस टॉपिक को छत्तीसगढ़ के भूगोल की “रीढ़” कहा जाता है। इसे समझ लेने पर आपको आगे नदियां, जलप्रपात, मिट्टियां और कृषि रटने की जरूरत नहीं पड़ेगी, वे अपने आप याद हो जाएंगी।

टॉपिक 3: छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक/भौतिक विभाग

भौगोलिक उच्चावच (Relief features), ढाल, बनावट और जलवायु की समानताओं के आधार पर छत्तीसगढ़ को 4 प्रमुख प्राकृतिक प्रदेशों में विभाजित किया गया है.

[छत्तीसगढ़ का प्राकृतिक विभाजन]

1. पूर्वी बघेलखंड का पठार
16.16% | 21,863 वर्ग किमी

2. जशपुर-सामरी पाट प्रदेश
4.59% | 6,208 वर्ग किमी

3. छत्तीसगढ़ का मैदान
50.34% | 68,064 वर्ग किमी

4. दण्डकारण्य का पठार
28.91% | 39,060 वर्ग किमी

1. पूर्वी बघेलखंड का पठार (Eastern Baghelkhand Plateau)

यह मध्य प्रदेश के बघेलखंड पठार का पूर्वी हिस्सा है, जो छत्तीसगढ़ के उत्तर-पश्चिम भाग में आता है।

  • कुल क्षेत्रफल: 21,863 वर्ग किलोमीटर (राज्य का 16.16% हिस्सा)।
  • शैल समूह (Rocks): मुख्य रूप से गोंडवाना शैल समूह (कोयला बहुल)।
  • मिट्टी: लाल-पीली मिट्टी।
  • ढाल (Slope): उत्तर की ओर (यही कारण है कि यहाँ की नदियां जैसे सोन, रिहंद उत्तर की ओर बहकर गंगा तंत्र में मिलती हैं)।
  • प्रमुख पहाड़ियां एवं चोटियां:
    • देवगढ़ की पहाड़ी: इसकी सबसे ऊंची चोटी देवगढ़ (1033 मीटर) है। यह सूरजपुर-कोरिया क्षेत्र में स्थित है।
    • चांगभाकर की पहाड़ी: यह मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में विस्तृत है।
    • रामगढ़ की पहाड़ी: सरगुजा जिले में स्थित है। यहाँ महाकवि कालिदास ने ‘मेघदूतम’ की रचना की थी। यहाँ की ‘सीताबेंगा’ गुफा को विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला माना जाता है।

2. जशपुर-सामरी पाट प्रदेश (Jashpur-Samri Pat Region)

यह छत्तीसगढ़ का सबसे छोटा, सबसे ऊंचा और सबसे ठंडा प्राकृतिक प्रदेश है। यह छोटानागपुर के पठार का हिस्सा है। यहाँ ‘पाट’ का मतलब होता है- समतल शीर्ष (Flat top) वाले ऊंचे पठार.

  • कुल क्षेत्रफल: 6,208 वर्ग किलोमीटर (राज्य का सबसे छोटा भाग – केवल 4.59%)।
  • शैल समूह: दक्कन ट्रैप (लावा निर्मित चट्टानें)।
  • प्रमुख खनिज: बॉक्साइट (एल्युमिनियम का अयस्क)।
  • कीट-जलवायु: अत्यधिक ठंडी। मैनपाट को ‘छत्तीसगढ़ का शिमला’ कहा जाता है (यहाँ 1962 में तिब्बती शरणार्थियों को बसाया गया था)।
  • प्रमुख पाट एवं चोटियां:
    • सामरी पाट: इसी पाट में गौरलाटा चोटी (1225 मीटर) स्थित है, जो छत्तीसगढ़ की सर्वोच्च चोटी है। यह बलरामपुर जिले के अंतर्गत आती है।
    • जशपुर पाट: यह छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा और लंबा पाट प्रदेश है।
    • मैनपाट: सरगुजा जिले में स्थित है। यहाँ से माण्ड नदी का उद्गम होता है।
    • जंरग पाट: बॉक्साइट का बहुत बड़ा भंडार क्षेत्र।

3. छत्तीसगढ़ का मैदान / महानदी बेसिन (Plain of Chhattisgarh)

यह छत्तीसगढ़ के मध्य भाग में स्थित है। इसे छत्तीसगढ़ का ‘हृदय स्थल’ और ‘धान का कटोरा’ भी कहा जाता है।

  • कुल क्षेत्रफल: 68,064 वर्ग किलोमीटर (राज्य का सबसे बड़ा प्राकृतिक भाग – 50.34%)।
  • शैल समूह: कड़प्पा शैल समूह की प्रधानता।
  • प्रमुख खनिज: चूना पत्थर (Limestone) और डोलोमाइट।
  • मिट्टी: लाल-पीली (मटासी) मिट्टी, जो धान की खेती के लिए सबसे उपयुक्त है।
  • ढाल: पूर्व की ओर (इसीलिए महानदी और उसकी सहायक नदियां पूर्व की ओर बहकर बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं)।
  • भौगोलिक उप-भाग:
    • मैकल पर्वत श्रेणी: यह इस मैदान के पश्चिमी भाग (कवर्धा, मुंगेली, राजनांदगांव) में स्थित है। यह सतपुड़ा पर्वत का हिस्सा है। इसकी सबसे ऊंची चोटी बदरगढ़ (1176 मीटर) है। यह श्रेणी कवर्धा जिले में ‘वृष्टि छाया प्रदेश’ (कम वर्षा का क्षेत्र) बनाती है।
    • छुरी-उदयपुर की पहाड़ियां: कोरबी और रायगढ़ के क्षेत्र में स्थित हैं।
    • दलहा पहाड़: जांजगीर-चांपा (अकलतरा) में स्थित है, जहाँ नागपंचमी पर मेला लगता है।

4. दण्डकारण्य का पठार (Dandakaranya Plateau)

यह छत्तीसगढ़ का दक्षिणी भाग है, जिसे बस्तर संभाग भी कहा जाता है। यह अत्यंत प्राचीन, पथरीला और वनाच्छादित (Forest cover) क्षेत्र है।

  • कुल क्षेत्रफल: 39,060 वर्ग किलोमीटर (राज्य का दूसरा सबसे बड़ा भाग – 28.91%)।
  • शैल समूह: धारवाड़ शैल समूह (अत्यंत प्राचीन रूपांतरित चट्टानें)।
  • प्रमुख खनिज: उच्च कोटि का लौह-अयस्क (Iron ore) और टिन (Tin)
  • मिट्टी: लाल-बलुई (टिकरा) और लाल-दोमट मिट्टी।
  • ढाल: दक्षिण और पश्चिम की ओर (इंद्रावती… और शबरी नदियां दक्षिण-पश्चिम की ओर बहकर गोदावरी में मिलती हैं)।
  • प्रमुख पहाड़ियां एवं चोटियां:
    • बैलाडीला की पहाड़ी: बीजापुर और दंतेवाड़ा जिले के क्षेत्र में है। इसका आकार ‘बैल के कूबड़’ (Hump of an Ox) जैसा है। इसकी सर्वोच्च चोटी नंदीराज (1210 मीटर) है, जो छत्तीसगढ़ की दूसरी सबसे ऊंची चोटी है। यहाँ विश्व प्रसिद्ध शुद्ध हेमेटाइट लोहा मिलता है।
    • अबूझमाड़ की पहाड़ी: नारायणपुर जिले में स्थित है। इसे छत्तीसगढ़ का ‘चेरापूंजी’ कहते हैं क्योंकि यहाँ राज्य में सबसे ज्यादा वर्षा (लगभग 187 सेमी) होती है।
    • केशकाल घाटी (तेलीन घाटी): कोण्डागांव जिले में स्थित है। इसमें 12 तीखे मोड़ (L-pin bends) हैं। यह घाटी महानदी बेसिन (उत्तर) और गोदावरी बेसिन (दक्षिण) के बीच ‘जल विभाजक’ (Water Divider) का कार्य करती है।

चोटियों का घटता क्रम (Decreasing Order of Peaks) — क्रोनोलॉजी फैक्ट

एग्जाम में टॉप-4 चोटियों की ऊंचाई और क्रम अक्सर पूछा जाता है:

  1. गौरलाटा → 1225 मीटर (सामरी पाट, बलरामपुर) — सबसे ऊंची
  2. नंदीराज → 1210 मीटर (बैलाडीला, दंतेवाड़ा)
  3. बदरगढ़ → 1176 मीटर (मैकल श्रेणी, कबीरधाम/कवर्धा)
  4. मैनपाट → 1152 मीटर (सरगुजा)

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