यह छत्तीसगढ़ के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण और परीक्षा की दृष्टि से सबसे “गहरा” टॉपिक है। छत्तीसगढ़ के प्राचीन क्षेत्रीय राजवंश (Ancient Regional Dynasties) से कूट (Statements) वाले प्रश्न और उनकी राजधानियों/सिक्कों के मिलान वाले प्रश्न हमेशा पूछे जाते हैं।
आइए, टॉपिक 2: छत्तीसगढ़ के प्राचीन क्षेत्रीय राजवंश को पूरी गहराई से, एक-एक वंश के क्रम (Chronology) के अनुसार समझते हैं।
छत्तीसगढ़ में ईसा की चौथी शताब्दी से लेकर आठवीं-नौवीं शताब्दी तक कई छोटे-बड़े स्थानीय राजवंशों ने शासन किया। इनका विवरण नीचे क्रमानुसार दिया गया है:
[छत्तीसगढ़ के प्राचीन राजवंश]
1. राजर्षितुल्य कुल वंश
आरंग क्षेत्र
2. नल वंश
बस्तर / महाकौशल
3. शरभपुरीय वंश
मल्हार / सिरपुर
4. पांडु वंश
सिरपुर का स्वर्णकाल
1. राजर्षितुल्य कुल वंश (Rajarshitulyakul Dynasty) — प्रथम स्थानीय राजवंश
- समय: चौथी से छठी शताब्दी ईस्वी।
- क्षेत्र / राजधानी: आरंग (रायपुर)।
- विशेष तथ्य: यह छत्तीसगढ़ का प्रथम स्थानीय राजवंश माना जाता है। इस वंश की जानकारी राजा भीमसेन द्वितीय के ‘आरंग ताम्रपत्र’ (Arang Copper Plate) से मिलती है।
- शासक क्रम: सूरा, दयित प्रथम, विभीषण, भीमसेन प्रथम, दयित वर्मा, और भीमसेन द्वितीय।
- राजचिह्न: सिंह (Lion)।
- Exam Fact: इस वंश के राजाओं को गुप्त शासकों के अधीन (Feudatories) माना जाता था क्योंकि भीमसेन द्वितीय के ताम्रपत्र में गुप्त संवत का प्रयोग किया गया है।
2. नल राजवंश (Nala Dynasty) — बस्तर का प्राचीन वंश
- समय: चौथी से बारहवीं शताब्दी ईस्वी (यह बहुत लंबे समय तक रुक-रुक कर चला)।
- क्षेत्र / राजधानी: पुष्करी (वर्तमान गढ़धनौरा, कोण्डागांव/बस्तर)।
- विशेष तथ्य: इनका मुख्य संघर्ष वाकाटक राजवंश के राजाओं के साथ हुआ था, जिसे इतिहास में ‘नल-वाकाटक संघर्ष’ कहा जाता है।
- प्रमुख शासक एवं घटनाएँ:
- वराहराज: इस वंश का पहला प्रतापी राजा। कोण्डागांव के ‘अड़ेंगा’ नामक स्थान से इसकी 29 सोने की मुद्राएँ (Gold Coins) मिली हैं।
- भवदत्त वर्मा: इसने वाकाटक राजा नरेन्द्रसेन को हराकर उसकी राजधानी ‘नंदीवर्धन’ को तहस-नहस कर दिया था।
- अर्थपति भट्टारक: वाकाटक राजा पृथ्वीसेन द्वितीय ने पलटवार किया और अर्थपति को हराकर नल वंश की राजधानी पुष्करी को नष्ट कर दिया।
- स्कन्दवर्मा: इसने पुष्करी को दोबारा बसाया। इसकी जानकारी इसके ‘पोड़ागढ़ शिलालेख’ से मिलती है।
- विलासतुंग: इस वंश का सबसे प्रसिद्ध राजा। इसने गरियाबंद के राजिम में ‘राजीव लोचन मंदिर’ (700-740 ईस्वी) का निर्माण करवाया था, जो पंचायतन शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है।
3. शरभपुरीय राजवंश (Sarabhapuriya Dynasty)
- समय: पांचवीं से छठी शताब्दी ईस्वी।
- संस्थापक: शरभराज।
- राजधानी: शुरुआत में ‘शरभपुर’ (जिसकी पहचान संबलपुर या सारंगढ़ से की जाती है), बाद में ‘प्रसन्नपुर’ और ‘सिरपुर’।
- धर्म एवं राजचिह्न: ये वैष्णव धर्म के अनुयायी थे, इसलिए स्वयं को ‘परम भागवत’ कहते थे। इनका राजचिह्न ‘गजलक्ष्मी’ (Gajalaxmi) था।
- प्रमुख शासक:
- प्रसन्नमात्र: इसने निडिला नदी (वर्तमान लीलागर नदी) के तट पर ‘प्रसन्नपुर’ (वर्तमान मल्हार, बिलासपुर) शहर बसाया। इसने अपने नाम के सोने के पानी चढ़े हुए (Gold-plated) सिक्के चलाए जिन पर चक्र, शंख और गजलक्ष्मी अंकित थे।
- सुदेवराज: इसके समय में इसके सामंत ‘इंद्रबल’ ने शक्ति संचय की और आगे चलकर शरभपुरीय वंश को समाप्त कर नए वंश की नींव रखी।
- प्रवरराज द्वितीय: इस वंश का अंतिम शासक।
4. पांडु राजवंश / सोमवंश (Pandu/Soma Dynasty) — सिरपुर का स्वर्णकाल
- समय: छठी से आठवीं शताब्दी ईस्वी।
- संस्थापक: इंद्रबल (इसने शरभपुरीय सत्ता को उखाड़ फेंका और सिरपुर को केंद्र बनाया)।
- क्षेत्र / राजधानी: श्रीपुर (वर्तमान सिरपुर, महासमुंद)।
- धर्म: ये मुख्यतः ‘परम वैष्णव’ थे, लेकिन इस वंश के सबसे महान राजा महाशिवगुप्त बालार्जुन ‘परम माहेश्वर’ (शिव भक्त) थे।
महाशिवगुप्त ‘बालार्जुन’ (The Greatest King)
- यह पांडु वंश का सबसे प्रतापी शासक था। बचपन में धनुर्विद्या में अत्यंत निपुण होने के कारण इन्हें ‘बालार्जुन’ (बालक अर्जुन) कहा गया।
- छत्तीसगढ़ का स्वर्णकाल (Golden Age): इनके शासनकाल (595-655 ईस्वी) को छत्तीसगढ़ के इतिहास का स्वर्णकाल माना जाता है, क्योंकि इस समय कला, वास्तुकला और धार्मिक सहिष्णुता चरम पर थी।
- ह्वेनसांग का आगमन: प्रसिद्ध चीनी बौद्ध यात्री ह्वेनसांग (Yuan Chwang) ने 639 ईस्वी में सिरपुर और मल्हार की यात्रा की थी। उसने अपने यात्रा वृत्तांत में इस क्षेत्र को ‘किया-सो-लो’ (दक्षिण कोसल) नाम दिया।
- सिरपुर का लक्ष्मण मंदिर: बालार्जुन की माता रानी वासटा (मगध के मौखरि राजा सूर्यवर्मा की पुत्री) ने अपने पति हर्षगुप्त की याद में सिरपुर में प्रसिद्ध ‘लक्ष्मण मंदिर’ का निर्माण करवाया था। यह मंदिर लाल ईंटों से निर्मित (Brick Temple) भारत के सबसे प्राचीन और सुंदर मंदिरों में से एक है।
डायरेक्ट एग्जाम क्विक रिवीजन टेबल (Borders & Keys)
| राजवंश (Dynasty) | संस्थापक (Founder) | राजधानी (Capital) | राजचिह्न / मुख्य पहचान |
|---|---|---|---|
| राजर्षितुल्य कुल | सूरा | आरंग | सिंह / छत्तीसगढ़ का पहला स्थानीय वंश |
| नल वंश | शिशुक (वराहराज प्रतापी) | पुष्करी | त्रिशूल / राजीव लोचन मंदिर (विलासतुंग) |
| शरभपुरीय | शरभराज | शरभपुर / मल्हार | गजलक्ष्मी / प्रसन्नमात्र के सोने के सिक्के |
| पांडु वंश | इंद्रबल | सिरपुर | गरुड़ / महाशिवगुप्त बालार्जुन (स्वर्णकाल) |