भाग 1: प्रागैतिहासिक काल एवं पौराणिक काल (Pre-historic & Mythological Era)।

कॉम्पिटेटिव एग्जाम्स (जैसे CGPSC और Vyapam) में इस टॉपिक से सबसे ज़्यादा सवाल शैलचित्रों (Rock Paintings) के स्थानों और रामायण कालीन स्थलों की मैचिंग से आते हैं। आइए इसे पूरी गहराई से समझते हैं।

भाग 1: प्रागैतिहासिक काल (Pre-Historic Period)

प्रागैतिहासिक काल वह समय है जिसके लिए हमारे पास कोई लिखित दस्तावेज़ या लिपि उपलब्ध नहीं है। मानव सभ्यता के इस शुरुआती दौर को पत्थरों के उपयोग के आधार पर 4 भागों में बाँटा गया है। छत्तीसगढ़ में इन चारों कालों के साक्ष्य मिले हैं:

[छत्तीसगढ़ का प्रागैतिहासिक काल]

1. पूर्व पाषाण काल
सिंघनपुर की गुफा, रायगढ़

2. मध्य पाषाण काल
कबरा पहाड़, रायगढ़

3. उत्तर पाषाण काल
महानदी घाटी, बिलासपुर

4. नव पाषाण काल
चितवा टोंगरी, बालोद

1. पूर्व पाषाण काल (Paleolithic Age)

  • प्रमुख स्थल: सिंघनपुर की गुफा (रायगढ़)
  • विशेष तथ्य:
    • यह छत्तीसगढ़ में खोजी गई सबसे पहली गुफा है (खोजकर्ता: एंडरसन, 1910)।
    • यहाँ गहरे लाल रंग के शैलचित्र (Rock Paintings) मिले हैं, जिनमें मानव आकृतियों को सीढ़ीनुमा या कतारबद्ध तरीके से दिखाया गया है। यहाँ शिकार करते हुए मनुष्यों के चित्र भी मिले हैं।
    • इसके अलावा रायगढ़ का भँवरखोल और गीधा भी इसी काल से संबंधित हैं।

2. मध्य पाषाण काल (Mesolithic Age)

  • प्रमुख स्थल: कबरा पहाड़ (रायगढ़)
  • विशेष तथ्य:
    • छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक शैलचित्र (Maximum Rock Paintings) इसी स्थान से प्राप्त हुए हैं।
    • यहाँ लाल रंग के शैलचित्रों में मुख्य रूप से छिपकली, घड़ियाल, सांभर और कुल्हाड़ी के चित्र मिले हैं।
    • यहाँ से पत्थर के छोटे और बारीक औज़ार (Microliths) भी प्राप्त हुए हैं।

3. उत्तर पाषाण काल (Late Stone Age)

  • प्रमुख स्थल: महानदी घाटी क्षेत्र और रायगढ़ का बोतल्दा, कर्मागढ़
  • विशेष तथ्य:
    • इस काल के चित्रों में मानव आकृतियों का आकार थोड़ा बड़ा और विकसित होने लगा था।
    • बोतल्दा की गुफा छत्तीसगढ़ की सबसे लंबी गुफाओं में से एक मानी जाती है, जहाँ प्राचीन काल के साक्ष्य हैं।

4. नव पाषाण काल (Neolithic Age)

  • प्रमुख स्थल: चितवा टोंगरी (बालोद), टेराम (रायगढ़) और अर्जुनी (दुर्ग)
  • विशेष तथ्य:
    • चितवा टोंगरी से चीनी गुफाओं के समान शैलचित्र मिले हैं, जो यह दर्शाते हैं कि मानव इस काल तक आते-आते बस्तियाँ बनाकर रहने लगा था।
    • यहाँ से पत्थरों के चिकने और सुडौल औज़ार, जैसे कुल्हाड़ी और मूसल प्राप्त हुए हैं।

विशेष पुरातात्विक स्थल – गढ़धनौरा (कोंडागांव): यहाँ से पाषाण काल के ‘महापाषाण कालीन स्मारक’ (Megaliths) मिले हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘मृत्युक शैया’ या पत्थर के घेरे कहा जाता है। यहाँ लगभग 500 ऐसे स्मारक मिले हैं जो शवों को दफनाने के बाद पत्थरों से घेरे जाने की प्रथा को दर्शाते हैं।

पौराणिक काल (Mythological Era)

पौराणिक काल को मुख्य रूप से दो भागों में बाँटा जाता है: रामायण काल और महाभारत काल

1. रामायण काल (Ramayana Period)

रामायण काल में छत्तीसगढ़ क्षेत्र को ‘दक्षिण कोसल’ (South Kosala) और बस्तर क्षेत्र को ‘दण्डकारण्य’ (Dandakaranya) कहा जाता था।

  • भाषा: इस क्षेत्र में ‘कोसली’ भाषा बोली जाती थी।
  • राजधानी: दक्षिण कोसल की राजधानी ‘कुशस्थली’ या ‘अयोध्या’ (शासकीय संदर्भ में) थी। भानुमंत छत्तीसगढ़ क्षेत्र के राजा थे, जिनकी पुत्री कौशल्या का विवाह अयोध्या के राजा दशरथ से हुआ था। इस नाते छत्तीसगढ़ भगवान राम का ‘ननिहाल’ है।
  • राम वन गमन पथ (Ram Van Gaman Path): भगवान राम ने अपने 14 वर्ष के वनवास का एक बहुत बड़ा हिस्सा (लगभग 10 वर्ष) छत्तीसगढ़ के जंगलों में बिताया था। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा इसके प्रमुख स्थलों को पर्यटन परिपथ के रूप में विकसित किया जा रहा है।

प्रमुख रामायण कालीन स्थल (उत्तर से दक्षिण का क्रम):

  1. सीतामढ़ी-हरचौका (मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर – MCB): इसे छत्तीसगढ़ में भगवान राम का प्रवेश द्वार माना जाता है। यहाँ पत्थरों को काटकर बनाई गई गुफाएँ हैं, जिन्हें सीता रसोई कहा जाता है।
  2. रामगढ़ की पहाड़ी (सरगुजा): यहाँ ‘सीताबेंगा’ (माता सीता का निवास), ‘लक्ष्मणबेंगा’ और ‘जोगीमारा’ गुफाएँ हैं।
  3. खरौद (जांजगीर-चांपा): इसे ‘छत्तीसगढ़ का काशी’ भी कहा जाता है। मान्यता है कि यहाँ श्रीराम ने खर और दूषण का वध किया था। यहाँ का ‘लक्ष्मणेश्वर मंदिर’ प्रसिद्ध है।
  4. शिवरीनारायण (जांजगीर-चांपा): महानदी, शिवनाथ और जोंक के संगम पर स्थित। यहाँ माता शबरी के आश्रम में भगवान राम ने जूठे बेर खाए थे।
  5. चन्दखुरी (रायपुर): पूरे विश्व में माता कौशल्या का एकमात्र मंदिर इसी स्थान पर तालाब के बीच में स्थित है।
  6. राजिम (गरियाबंद): यहाँ लोमश ऋषि का आश्रम है, जहाँ राम, सीता और लक्ष्मण ठहरे थे।
  7. पंचवटी (कांकेर/बस्तर क्षेत्र): दण्डकारण्य का वह क्षेत्र जहाँ से माता सीता का हरण हुआ था।

2. महाभारत काल (Mahabharata Period)

महाभारत काल में इस क्षेत्र को ‘प्राग्कोसल’ कहा जाता था और बस्तर को ‘कान्तार’ के नाम से जाना जाता था।

प्रमुख महाभारत कालीन स्थल:

  • सिरपुर (महासमुंद/रायपुर क्षेत्र): इसका प्राचीन नाम ‘चित्रांगदपुर’ था। यह अर्जुन के पुत्र बभ्रुवाहन की राजधानी थी।
  • आरंग (रायपुर): इसे ‘मंदिरों की नगरी’ कहा जाता है। मान्यता है कि यहाँ राजा मोरध्वज ने भगवान कृष्ण के परीक्षा लेने पर अपने पुत्र को आरे से चीर दिया था, जिससे इसका नाम ‘आरंग’ पड़ा। यहाँ का ‘भांडदेवल जैन मंदिर’ प्रसिद्ध है।
  • गुंजी (सक्ती – दमऊदहरा): यहाँ राजा वरदत्त श्री का एक शिलालेख मिला है, जिसमें महाभारत कालीन प्रथाओं और ऋषियों को गाय दान देने का उल्लेख है।
  • खल्लारी (महासमुंद): इसका प्राचीन नाम ‘खल्लवाटिका’ था। यहाँ पहाड़ी पर ‘लाक्षागृह’ के साक्ष्य मिले हैं, जहाँ भीम के पदचिह्न आज भी मौजूद हैं।

डायरेक्ट एग्जाम मैचिंग की-फैक्ट्स (Quick Revision)

स्थल (Site)काल / संबंधवर्तमान जिला
सिंघनपुर की gufaपूर्व पाषाण काल (प्रथम खोजी गुफा)रायगढ़
कबरा पहाड़मध्य पाषाण काल (सर्वाधिक शैलचित्र)रायगढ़
चन्दखुरीमाता कौशल्या मंदिर (ननिहाल)रायपुर
सीतामढ़ी-हरचौकाराम वन गमन (प्रवेश द्वार)MCB (नया जिला)
सिरपुर (चित्रांगदपुर)बभ्रुवाहन की राजधानी (महाभारत)महासमुंद

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