टॉपिक 7: छत्तीसगढ़ के वन एवं राष्ट्रीय उद्यान/अभयारण्य

छत्तीसगढ़ के वनों से आर्थिक और पर्यावरण, दोनों दृष्टियों से बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न बनते हैं। छत्तीसगढ़ वन संपदा के मामले में देश के सबसे धनी राज्यों में से एक है।

आइए, टॉपिक 7: छत्तीसगढ़ के वन एवं राष्ट्रीय उद्यान/अभयारण्य को पूरी गहराई और प्रामाणिक आंकड़ों के साथ समझते हैं।

भाग 1: छत्तीसगढ़ की वन संपदा (Forest Wealth)

छत्तीसगढ़ के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल (1,35,192 वर्ग किमी) के लगभग 44.21% भाग (लगभग 59,772 वर्ग किमी) पर वन पाए जाते हैं।

  • देश में स्थान:
    • वन क्षेत्र (Forest Area) के मामले में छत्तीसगढ़ पूरे भारत में तीसरे (3rd) स्थान पर है (मध्य प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश के बाद)।
    • वनावरण प्रतिशत (Forest Cover %) के मामले में यह देश के बड़े राज्यों में अग्रणी है।

वनों का प्रशासनिक वर्गीकरण (Administrative Classification)

सुरक्षा और सरकारी नियंत्रण के आधार पर छत्तीसगढ़ के वनों को तीन भागों में बांटा गया है, इसके प्रतिशत आंकड़े एग्जाम में सीधे पूछे जाते हैं:

[वनों का प्रशासनिक वर्गीकरण]

1. आरक्षित वन (Reserved)
~43.13%
सर्वाधिक: सरगुजा

2. संरक्षित वन (Protected)
~40.22%
सर्वाधिक: सरगुजा/करवा

3. अवर्गीकृत वन (Unclassified)
~16.65%
सर्वाधिक: दंतेवाड़ा

नियमों का विवरण:

  1. आरक्षित वन: यह पूर्णतः सरकारी नियंत्रण में होते हैं। यहाँ लकड़ी काटना, पशु चराना या आम लोगों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित (Banned) होता है।
  2. संरक्षित वन: यहाँ नियमों के तहत स्थानीय लोगों को ईंधन की लकड़ी इकट्ठा करने और मवेशी चराने की सीमित छूट (Permission) होती है।
  3. अवर्गीकृत वन: ऐसे वन जो ऊपर के दोनों श्रेणियों में नहीं आते। यहाँ नियम बहुत ढीले होते हैं।

वनों का प्रजाति/वृक्ष आधारित वर्गीकरण

छत्तीसगढ़ के वनों में मुख्य रूप से दो प्रकार के कीमती वृक्ष बहुतायत में पाए जाते हैं:

  • साज/साल वन (Sal Forest) — ~40.56%: साल (सई) छत्तीसगढ़ का राजकीय वृक्ष है। इसकी लकड़ी बहुत कठोर और इमारती कामों (जैसे रेलवे स्लीपर) के लिए उपयोगी होती है। बस्तर जिले को “साल वनों का द्वीप” कहा जाता है।
  • सगौन वन (Teak Forest) — ~9.42%: सगोैन की लकड़ी अपनी फिनिशिंग और फर्नीचर के लिए प्रसिद्ध है। छत्तीसगढ़ में सबसे उच्च कोटि के सगौन वन नारायणपुर के ‘खुरसेल घाटी’ (Khursel Valley) में पाए जाते हैं।
  • मिश्रित वन (Mixed Forest) — ~43.52%: इसमें बांस, महुआ, तेंदू, आंवला, साजा आदि वृक्ष मिश्रित रूप से पाए जाते हैं।

Exam Fact: छत्तीसगढ़ में तेंदू पत्ता को ‘हरा सोना’ (Green Gold) कहा जाता है। बीड़ी बनाने में इस्तेमाल होने वाले तेंदू पत्ता के उत्पादन में छत्तीसगढ़ का देश में पहला स्थान है।

भाग 2: राष्ट्रीय उद्यान एवं अभयारण्य (National Parks & Sanctuaries)

छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों के संरक्षण के लिए 3 राष्ट्रीय उद्यान (National Parks) और 11 अभयारण्य (Sanctuaries) बनाए गए हैं। इसके अलावा राज्य में 4 टाइगर रिजर्व भी हैं।

1. राष्ट्रीय उद्यान (National Parks) — कुल 3

राष्ट्रीय उद्यानजिलाक्षेत्रफलविशेष तथ्य
गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यानMCB, कोरिया, सूरजपुर1441 वर्ग किमीयह छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है। इसका पुराना नाम ‘संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान’ था। यह देश का 53वां टाइगर रिजर्व भी घोषित किया जा चुका है।
इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यानबीजापुर1258 वर्ग किमीस्थापना 1978 (यह राज्य का पहला राष्ट्रीय उद्यान है)। इसके बीच से इंद्रावती नदी बहती है। यहाँ ‘कुटरू गेम सैंक्चुरी’ स्थित है, जो जंगली भैंसों (Wild Buffalo) के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है।
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यानबस्तर (जगदलपुर)200 वर्ग किमीयह छत्तीसगढ़ का सबसे छोटा राष्ट्रीय उद्यान है (स्थापना: 1982)। यहाँ छत्तीसगढ़ का राजकीय पक्षी ‘पहाड़ी मैना’ संरक्षित है। इसी उद्यान में प्रसिद्ध ‘तीरथगढ़ जलप्रपात’ और ‘कुटुंबसर गुफा’ (अंधी मछलियों के लिए प्रसिद्ध) स्थित है।

2. वन्यजीव अभयारण्य (Wild Life Sanctuaries) — कुल 11

इन 11 अभयारण्यों से परीक्षा में सीधे ‘सबसे बड़ा’, ‘सबसे छोटा’, ‘सबसे पुराना’ और ‘जिला’ पूछा जाता है:

  • तमोर पिंगला (सूरजपुर): 608 वर्ग किमी — यह छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा अभयारण्य है।
  • बादलखोल (जशपुर): 105 वर्ग किमी — यह छत्तीसगढ़ का सबसे छोटा अभयारण्य है। यहाँ ईको-टूरिज्म विकसित किया जा रहा है।
  • सीतानदी (धमतरी): 559 वर्ग किमी — स्थापना 1974 (यह छत्तीसगढ़ का सबसे पुराना अभयारण्य है)। यहाँ सर्वाधिक तेंदुए पाए जाते हैं।
  • भोरमदेव (कवर्धा): 163 वर्ग किमी — स्थापना 2001 (यह छत्तीसगढ़ का सबसे नया अभयारण्य है)। यह भोरमदेव मंदिर के समीप पहाड़ियों पर स्थित है।
  • अचानकमार (मुंगेली): यह एक प्रसिद्ध बायोस्फीयर रिजर्व (Biosphere Reserve) भी है। यहाँ से मनियारी नदी का उद्गम होता है।
  • पामेड़ और भैरमगढ़ (बीजापुर): ये दोनों अभयारण्य मुख्य रूप से वनभैंसों के संरक्षण के लिए बनाए गए हैं।
  • गोमर्डा (सारंगढ़-बिलाईगढ़): यह सोनकुत्ता और जंगली सांडों के लिए जाना जाता है।
  • सेमरसोत (बलरामपुर), बारनवापारा (बलौदाबाजार/महासमुंद), उदंती (गरियाबंद)।

छत्तीसगढ़ के टाइगर रिजर्व (Tiger Reserves)

छत्तीसगढ़ में वर्तमान में निम्नलिखित क्षेत्रों को मिलाकर प्रोजेक्ट टाइगर संचालित किया जा रहा है:

  1. इंद्रावती टाइगर रिजर्व (बीजापुर)
  2. अचानकमार टाइगर रिजर्व (मुंगेली)
  3. उदंती-सीतानदी संयुक्त टाइगर रिजर्व (गरियाबंद-धमतरी)
  4. गुरु घासीदास-तमोर पिंगला संयुक्त टाइगर रिजर्व (कोरिया-सूरजपुर क्षेत्र)

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top