टॉपिक 5: छत्तीसगढ़ का आधुनिक इतिहास एवं स्वतंत्रता आंदोलन

यह छत्तीसगढ़ के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण, प्रेरक और परीक्षा में सबसे ज़्यादा अंकों के भार वाला खंड है: आधुनिक इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन एवं प्रमुख विद्रोह

इस काल को हम तीन मुख्य उप-विषयों में बाँटकर पूरी गहराई से समझेंगे: 1857 की क्रांति, प्रमुख जनजातीय विद्रोह और राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन में छत्तीसगढ़ की भूमिका।छत्तीसगढ़ का आधुनिक इतिहास एवं स्वतंत्रता आंदोलन

1. 1857 की क्रांति और छत्तीसगढ़ के शहीद

छत्तीसगढ़ में 1857 की राष्ट्रीय क्रांति का बिगुल देश के अन्य हिस्सों की तरह ही पूरी प्रखरता से गूंजा था। यहाँ से दो महान नायकों के नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हैं:

  • शहीद वीर नारायण सिंह (सोनाखान के जमींदार):
    • परिचय: ये बिंझवार जनजाति के थे। इन्हें “छत्तीसगढ़ का प्रथम शहीद” माना जाता है।
    • घटनाक्रम: 1856 के भीषण अकाल के समय इन्होंने व्यापारियों के अनाज गोदामों के ताले तुड़वाकर अनाज भूखी जनता में बाँट दिया था। ब्रिटिश सरकार ने इन्हें राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया, लेकिन ये जेल से भाग निकले और 500 बंदूकों की एक सेना खड़ी की।
    • शहादत: कटंगी के पास ब्रिटिश सेना के साथ इनका भीषण युद्ध हुआ। अंततः इन्हें गिरफ्तार कर 10 दिसंबर 1857 को रायपुर के जयस्तंभ चौक पर मृत्युदंड दिया गया।
  • वीर हनुमान सिंह (छत्तीसगढ़ के मंगल पांडे):
    • परिचय: ये रायपुर की ब्रिटिश सेना (3rd मैगजीन लश्कर) में सार्जेंट मेजर के पद पर थे।
    • घटनाक्रम: 18 जनवरी 1858 को इन्होंने बैरकपुर के मंगल पांडे से प्रेरित होकर अपने ब्रिटिश अधिकारी सार्जेंट सिडवेल की तलवार से काटकर हत्या कर दी।
    • विशेष तथ्य: इनके 17 साथियों को पकड़कर फांसी दे दी गई, लेकिन हनुमान सिंह अंग्रेजों के हाथ कभी नहीं आए (वे फरार रहे)। इसी कारण इन्हें ‘छत्तीसगढ़ का मंगल पांडे’ कहा जाता है।

2. छत्तीसगढ़ के प्रमुख जनजातीय एवं स्थानीय विद्रोह

ब्रिटिश शासन और मराठों के आर्थिक शोषण, उनकी वनांचल नीतियों और संस्कृति में हस्तक्षेप के खिलाफ बस्तर और सरगुजा के आदिवासियों ने कई ऐतिहासिक विद्रोह किए। परीक्षा में इनका वर्ष और नेतृत्वकर्ता हमेशा पूछा जाता है:

विद्रोह का नामवर्ष (Year)नेतृत्वकर्ता (Leader)विशेष तथ्य
हलबा विद्रोह1774 – 1779अजमेर सिंहयह छत्तीसगढ़ का प्रथम जनजातीय विद्रोह था। यह बस्तर के काकतीय वंश के उत्तराधिकार का संघर्ष था।
परलकोट विद्रोह1825गेंद सिंहगेंद सिंह को “बस्तर का प्रथम शहीद” कहा जाता है। विद्रोह का प्रतीक धावड़ा वृक्ष की टहनी था।
तारापुर विद्रोह1842 – 1854दलगंजन सिंहकर (टैक्स) बढ़ाए जाने के विरोध में आदिवासियों का आंदोलन।
लिंगागिरी विद्रोह1856धुंधाराम माड़ियाइसे “बस्तर का महान मुक्ति संग्राम” भी कहा जाता है।
मुरिया विद्रोह1876झाड़ा सिरहाबस्तर के राजा के दीवान गोपीनाथ कपंरदार के अत्याचारों के खिलाफ। इसमें अंग्रेजों को झुकना पड़ा और ‘बस्तर का काला कानून’ वापस हुआ।
भूमकाल विद्रोह1910गुंडाधुरयह बस्तर का सबसे व्यापक और सुसंगठित विद्रोह था। इसका प्रतीक ‘लाल मिर्च और आम की टहनी’ था। গুন্ডাধুর ने अंग्रेजों की नाक में दम कर दिया था।

3. राष्ट्रीय आंदोलन में छत्तीसगढ़ का योगदान (1920 – 1947)

जैसे-जैसे देश में महात्मा गांधी के नेतृत्व में राष्ट्रीय चेतना बढ़ी, छत्तीसगढ़ के नेता भी अग्रिम पंक्ति में खड़े हुए। यहाँ के प्रमुख घटनाक्रम इस प्रकार हैं:

क. कँडेल नहर सत्याग्रह (1920)

  • स्थान: धमतरी जिला (कँडेल ग्राम)।
  • कारण: ब्रिटिश सरकार द्वारा ग्रामीणों पर जबरन ‘नहर जल टैक्स’ थोपा गया और टैक्स न चुकाने पर उनके मवेशी कुर्क कर लिए गए।
  • नेतृत्व: पंडित सुंदरलाल शर्मा (इन्हें “छत्तीसगढ़ का गांधी” कहा जाता है)।
  • परिणाम: इस आंदोलन के समर्थन के लिए पं. सुंदरलाल शर्मा स्वयं कोलकाता जाकर महात्मा गांधी को पहली बार छत्तीसगढ़ लेकर आए (20 दिसंबर 1920)। गांधी जी के पैर रखते ही ब्रिटिश सरकार को झुकना पड़ा और टैक्स माफ कर दिया गया। यह भारत का पहला सफल किसान आंदोलन माना जाता है।

ख. जंगल सत्याग्रह (1922 – 1930)

सविनय अवज्ञा आंदोलन (Civil Disobedience Movement) के दौरान छत्तीसगढ़ में नमक कानून के स्थान पर ‘जंगल कानून’ तोड़ा गया, क्योंकि यहाँ नमक की खदानें नहीं थीं।

  • सिहावा नगरी जंगल सत्याग्रह (1922): यह राज्य का प्रथम जंगल सत्याग्रह था।
  • गट्टासिली जंगल सत्याग्रह (1930): धमतरी में नारायणराव मेघावाले के नेतृत्व में।
  • तमोरा जंगल सत्याग्रह (1930): महासमुंद में। यहाँ एक युवा बालिका ‘दयालवती’ ने ब्रिटिश अधिकारी को थप्पड़ मार दिया था, जो उसकी वीरता का प्रतीक बना।

ग. बी.एन.सी. मिल मजदूर हड़ताल (1920)

  • स्थान: राजनांदगांव (बंगाल-नागपुर कॉटन मिल)।
  • नेतृत्व: ठाकुर प्यारेलाल सिंह (छत्तीसगढ़ में श्रमिक आंदोलन के जनक)।
  • विशेषता: यह हड़ताल लगातार 37 दिनों तक चली, जो उस समय भारत के इतिहास की सबसे लंबी शांतिपूर्ण मजदूर हड़ताल थी। इसमें राष्ट्रीय नेता वी. वी. गिरि (जो बाद में भारत के राष्ट्रपति बने) भी शामिल हुए थे।

घ. भारत छोड़ो आंदोलन (1942)

  • रायपुर डायनामाइट कांड: बिलख नारायण अग्रवाल और उनके साथियों ने रायपुर जेल की दीवार को डायनामाइट से उड़ाकर राजबंदियों को छुड़ाने की योजना बनाई थी।
  • दुर्गाप्रसाद सिदार: इन्होंने रायगढ़ क्षेत्र में गुप्त रूप से आंदोलन का संचालन किया।

डायरेक्ट एग्जाम क्विक रिवीजन टेबल (Direct Score Points)

व्यक्तित्व / घटनादी गई उपाधि / पहचानमुख्य कार्य
शहीद वीर नारायण सिंहछत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद1857 की क्रांति (सोनाखान)
हनुमान सिंहछत्तीसगढ़ के मंगल पांडेsargent सिडवेल की हत्या (रायपुर)
पं. सुंदरलाल शर्माछत्तीसगढ़ के गांधी / पुरोधाकँडेल नहर सत्याग्रह, छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वप्नदृष्टा
ठाकुर प्यारेलाल सिंहश्रमिक आंदोलन के जनकबी.एन.सी. मिल हड़ताल (राजनांदगांव)
गुंडाधुरभूमकाल विद्रोह के महानायक1910 का बस्तर का महान विद्रोह

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top